पश्चिमी रामगंगा घाटी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी | गेवाड़, सल्ट और चौकोट के वीरों की पूरी सूची |

ईश्वरी दत्त फुलोरिया
(स्वतंत्रता संग्राम सेनानी-आदिग्राम फुलोरिया)
फोटो साभार - श्री राजेश फूलोरिया एवं श्री नवीन फूलोरिया 

पश्चिमी रामगंगा घाटी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी

गेवाड़, सल्ट और चौकोट की धरती से उठी आजादी की आवाज

पश्चिमी रामगंगा घाटी केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य, प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक स्मृतियों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में यहाँ के ग्रामीण समाज की सक्रिय भागीदारी के कारण भी इसका इतिहास विशेष महत्व रखता है।

रामगंगा के किनारे बसे गाँवों से लेकर गेवाड़, सल्ट और चौकोट की पहाड़ी पट्टियों तक स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना पहुँची। इस चेतना को केवल बड़े राजनीतिक नेताओं ने नहीं, बल्कि गाँवों में रहने वाले सामान्य लोगों, किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भी आगे बढ़ाया।

किसी ने सत्याग्रह किया, किसी ने आंदोलन में भाग लिया, किसी ने जेल की यातनाएँ सहीं और अनेक लोगों ने आर्थिक दण्ड भी भुगता। इस प्रकार स्वतंत्रता का संघर्ष यहाँ केवल राजनीतिक आंदोलन नहीं रहा, बल्कि गाँव-गाँव की भागीदारी का जनआंदोलन बन गया।


गेवाड़ पट्टी : मासी से उठी स्वतंत्रता की चेतना

गेवाड़ पट्टी में मासी स्वतंत्रता आंदोलन की गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा। उपलब्ध अभिलेखों में मासी क्षेत्र से श्री अम्बा दत्त शर्मा और श्री शीश राम मासीवाल के नाम मिलते हैं।

खनूली से डॉ. मुरलीधर पाण्डे का नाम दर्ज है।

श्री राम दत्त फुलोरिया

इसी क्षेत्र के आदिग्राम फुलोरिया ने स्वतंत्रता आंदोलन में उल्लेखनीय योगदान दिया। यहाँ से श्री ईश्वरी दत्त फुलोरिया, श्री राम दत्त, श्री देवी दत्त, श्री विष्णु दत्त सहित अनेक सेनानियों के नाम दर्ज हैं।

थापला से श्री जमन सिंह और श्री धन सिंह, कनौड़ी से श्री तेग सिंह, श्री बद्रीलाल वर्मा और श्री तेज सिंह भण्डारी, काला चौना से श्री दान सिंह तथा कनगाड़ से श्री बोरा सिंह का नाम मिलता है।

पटलगाँव से श्री भवानी दत्त और श्री हयात सिंह भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सूची में दर्ज हैं।

इन नामों से स्पष्ट होता है कि स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना गेवाड़ क्षेत्र के विभिन्न गाँवों तक व्यापक रूप से पहुँची थी।


चौखुटिया क्षेत्र : गाँवों से निकली आंदोलन की आवाज

चौखुटिया क्षेत्र से भी अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का उल्लेख मिलता है।

चौखुटिया से श्री आनन्द सिंह और श्री उमेद सिंह, नागाड़ से श्री कमल राम आर्य और श्री मोहन सिंह, बसभीड़ा से श्री केसर सिंह तथा महतगाँव से श्री तारा दत्त, श्री त्रिलोचन हर्बोला, श्री धरम सिंह, श्री नन्द किशोर हर्बोला, श्री भवानी दत्त और श्री रूप सिंह के नाम दर्ज हैं।

उडलीखान से श्री जोग सिंह, बरलगाँव से श्री त्रिलोक सिंह, तथा महाकालेश्वर से अनेक सेनानियों के नाम मिलते हैं।

महाकालेश्वर की सूची में श्री खीम सिंह, श्री पद्म सिंह, श्री पूरन सिंह, श्री पान सिंह, श्री बुद्धि सिंह, श्री भवान सिंह, श्री भगत सिंह, श्री मदन सिंह, श्री मनदेव, श्री लाल सिंह, श्री हयात सिंह तथा श्री पान सिंह भण्डारी के नाम दर्ज हैं।

इसी क्रम में जमराड़ से श्री नारायण सिंह, पीपलधार से श्री नारायण सिंह, श्री नन्द राम और श्री शिव दत्त, रामपुर से श्री बची पहाड़ी, बेरती-चित्रेश्वर से श्री मोहन सिंह, बौनीगाड़ से श्री शिव दत्त और बाखली से श्री लक्ष्मण सिंह के नाम मिलते हैं।

हाट-धामदेवल से श्री हयात सिंह और श्री शेर सिंह, ग्वैलचैड़ा से श्री हयात सिंह और श्री हरि सिंह, तथा धुधलिया से श्री हीरा सिंह का नाम दर्ज है।


चौकोट पट्टी : स्वतंत्रता संघर्ष की एक विस्तृत स्मृति

चौकोट पट्टी भी स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण स्मृतियों को अपने भीतर समेटे हुए है।

तल्ला चौकोट

पैठना से श्री ज्योतिराम काण्डपाल और श्री भैरव दत्त जोशी के नाम दर्ज हैं।

तिमली से श्री रूद्र सिंह बिष्ट, श्री जंग बहादुर सिंह बिष्ट, श्री बचन सिंह रावत, श्री जसवन्त सिंह बिष्ट और श्री दुर्गा सिंह बिष्ट स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सूची में मिलते हैं।

बिचला चौकोट

उदयपुर से श्री खुशाल सिंह मनराल का नाम दर्ज है।

मल्ला चौकोट

देघाट-स्याल्दे क्षेत्र की सूची विशेष रूप से विस्तृत है। इसमें श्री हरीकृष्ण, श्री हीरामणी, श्री कुशल सिंह, श्री खिमानन्द, श्री गंगा सिंह, श्री चिंतामणी, श्री देवी दत्त, श्री दिवान सिंह, श्री नन्दकिशोर, श्री प्रेम सिंह, श्री बचे सिंह, श्री बद्री दत्त, श्री भगत सिंह, श्री राम दत्त, श्रीमती राधा देवी, श्री लक्ष्मण सिंह, श्री हर्षदेव पुत्र श्री बचीराम तथा श्री हर्षदेव पुत्र श्री देवराम के नाम दर्ज हैं।

यह सूची इस बात की ओर संकेत करती है कि देघाट-स्याल्दे क्षेत्र में स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक सामाजिक भागीदारी रही।


सल्ट : स्वतंत्रता आंदोलन की सशक्त भूमि

पश्चिमी रामगंगा घाटी के स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख सल्ट के बिना अधूरा है।

सल्ट क्षेत्र के खुमाड़ से बड़ी संख्या में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम उपलब्ध होते हैं।

इनमें श्री पुरुषोत्तम उपाध्याय, श्री रघुवर दत्त उपाध्याय, श्री गंगा राम उपाध्याय, श्री पान देव उपाध्याय, श्री भवानी दत्त उपाध्याय, श्री पूर्णानन्द उपाध्याय, श्री हरि दत्त वैद्य जी, श्री लालमणी उपाध्याय, श्री हयात सिंह भण्डारी, श्री खीम सिंह भण्डारी, श्री देवी दत्त काण्डपाल, श्री नीलाम्बर नदोलिया, श्री दीवान सिंह महरा, श्री नारायण दत्त उपाध्याय (कालदेव), श्री गोपाल सिंह बोरा, श्री केशव दत्त उपाध्याय, श्री हीरामणी उपाध्याय, श्री माधवानन्द उपाध्याय, श्री बद्री दत्त शर्मा, श्री नन्दराम नखुड़िया, श्री लीलाधर काण्डपाल, श्री नन्दराम उपाध्याय, श्री खीमदेव काण्डपाल, श्री मनशोधन कोटिया, श्री रूपदेव जोशी, श्री नैनमणी उपाध्याय तथा श्री उदे सिंह शामिल हैं।

इतने अधिक नामों का एक ही क्षेत्र से दर्ज होना इस बात का महत्वपूर्ण दस्तावेजी संकेत है कि खुमाड़ और आसपास के क्षेत्र में स्वतंत्रता आंदोलन का सामाजिक आधार व्यापक था।


सल्ट के अन्य गाँवों के सेनानी

कटरिया से श्री गंगा दत्त शास्त्री, श्री बचीराम शर्मा, श्री गणेश दत्त शर्मा, श्री हरी दत्त शर्मा, श्री लछीराम शर्मा, श्री भोला दत्त नखुड़िया, श्री गोपाल दत्त नखोड़िया और श्री आनदेव पालीवाल के नाम दर्ज हैं।

कफल्टा से श्री उदे सिंह बोरा, श्री माधवानन्द उपाध्याय और श्री दीवान सिंह बोरा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के रूप में सूचीबद्ध हैं।

पिपना से श्री प्रेम बल्लभ उपाध्याय, श्री हरीदत्त उपाध्याय, श्री किशनानन्द उपाध्याय, श्री बिणदेव, श्री बद्री दत्त, श्री मोतीराम, श्री गुरुदेव, श्री बचे सिंह कड़ाकोटी, श्री भोला दत्त सत्यवली, श्री टीकाराम, श्री गुसाईं देव, श्री उदेराम और श्री नारायण दत्त के नाम मिलते हैं।

सिलोर से श्री मथुरा दत्त और श्री अम्बा दत्त भट्ट, जंतरा से श्री बचे सिंह, चमकना से श्री लक्ष्मण सिंह अधिकारी, श्री प्रताप सिंह मालगुजार, श्री मोहर सिंह और श्री नारायण सिंह के नाम दर्ज हैं।

जामड़ी से श्री तारा दत्त, डभरा से श्री मंगल सिंह, श्री कुशल सिंह और श्री उत्तम सिंह, तथा डंगूला से श्री लक्ष्मण सिंह धुसाद, श्री बचे सिंह धुसाद और श्री हीरा सिंह धुसाद का उल्लेख मिलता है।

भ्याड़ी से श्री बहादुर सिंह, श्री ध्यान सिंह, श्री आनन्द सिंह और श्री झुसदेव, बैला से श्री प्रेम सिंह नयाल बिष्ट, श्री खुशाल सिंह रावत और श्री भीम सिंह नयाल बिष्ट, पोखरी से अनेक सेनानियों तथा छतेड़ से श्री हरिद्वार गिरी का नाम दर्ज है।

इसके अतिरिक्त उपलब्ध सूची में श्री गोविन्द ध्यानी, श्री मदन मोहन उपाध्याय, श्री लोकमणी नैलवाल, श्री बचीराम उपाध्याय, श्री दयाराम नैलवाल, श्री तुलाराम नैनवाल (प्रथम), श्री तुलाराम नैनवाल (द्वितीय), श्री अम्बा दत्त नैलवाल, श्री मथुरा दत्त नखुड़िया और श्री भानदेव उपाध्याय के नाम भी मिलते हैं।


आदिग्राम फुलोरिया : जेल, जुर्माना और संघर्ष की कहानी

मासी क्षेत्र का आदिग्राम फुलोरिया स्वतंत्रता आंदोलन की दृष्टि से विशेष उल्लेखनीय है।

तालिका में यहाँ के सेनानियों के साथ उनके कारावास की अवधि और अर्थदण्ड का भी विवरण दिया जा रहा है  

क्र. सं.सेनानीपिता का नामकारावास का विवरणअर्थदण्ड
1.श्री ईश्वरीदत्त फुलोरियाश्री जयकृष्ण फुलोरिया1930 – 4 माह; 1940 –9 माह;
1942 – 6-6 माह 
2.श्री त्रिलोचन फुलोरियाश्री गुजदेव फुलोरिया1930 – 1 वर्ष; 1941 – 10 माह₹200
3.श्री रामदत्त फुलोरियाश्री मनोरथ फुलोरिया1941 – 10 माह; 1942 – 2 वर्ष₹50
4.श्री देवीदत्त फुलोरियाश्री पुरुषोत्तम फुलोरिया1930 – 4 माह; 1942 – 2 वर्ष₹200
5.श्री विष्णुदत्त फुलोरियाश्री दयाराम फुलोरिया1942 – 1 वर्ष₹50
6.श्री ईश्वरीदत्त फुलोरियाश्री पुरुषोत्तम फुलोरिया1942 – 1 वर्ष₹50
7.श्री रामदत्त फुलोरियाश्री राधापति फुलोरिया1930 – 4 माह
8.श्री उमाकान्त फुलोरियाश्री मनोरथ फुलोरिया         -

यह तालिका स्वतंत्रता संग्राम के उस पक्ष को सामने लाती है जिसे केवल घटनाओं और नारों से नहीं समझा जा सकता। कारावास और आर्थिक दण्ड स्वतंत्रता आंदोलन में व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर दिए गए मूल्य की ओर संकेत करते हैं।                                           


आदिग्राम फुलोरिया के स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में यहाँ स्मृति-द्वार का निर्माण किया गया है। साथ ही, उनके नाम और स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान की स्मृति में शिलालेख भी स्थापित किए गए हैं।


5 सितम्बर और खुमाड़ की शहीद स्मृति


देघाट में बने ये दोनों शहीद स्मारक, स्वतंत्रता संग्राम में क्षेत्र के वीर सेनानियों के अदम्य साहस और बलिदान की अमर गाथा कहते हैं। ये स्मारक आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता की कीमत और देशभक्ति की प्रेरणा सदैव देते रहेंगे।

पश्चिमी रामगंगा क्षेत्र के स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों में खुमाड़ का विशेष स्थान है।

5 सितम्बर 1947 को सर्वप्रथम खुमाड़ में शहीद दिवस मनाया गया। आज भी क्षेत्रीय स्तर पर 5 सितम्बर को खुमाड़ में शहीद दिवस और मेले के आयोजन की परंपरा का उल्लेख मिलता है।

इस प्रकार स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी आंदोलन की स्मृति केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्थानीय स्मृति, जनभागीदारी और वार्षिक आयोजन के माध्यम से जीवित रही।


पश्चिमी रामगंगा घाटी का स्वतंत्रता संग्राम : एक सामूहिक इतिहास

गेवाड़, चौखुटिया, चौकोट और सल्ट की इन सूचियों को साथ रखकर देखने पर स्वतंत्रता आंदोलन की एक व्यापक तस्वीर सामने आती है।

यह इतिहास केवल कुछ प्रसिद्ध नामों का इतिहास नहीं है। इसमें मासी के गाँव हैं, खुमाड़ की धरती है, देघाट-स्याल्दे का जनसमुदाय है, चौखुटिया के गाँव हैं और रामगंगा घाटी के अनेक छोटे-छोटे गाँव हैं।

कहीं जेल की सजा मिली, कहीं अर्थदण्ड लगाया गया और कहीं आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण परिवारों को कठिनाइयाँ झेलनी पड़ीं। फिर भी स्वतंत्रता की आकांक्षा कमजोर नहीं हुई।

आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली, लेकिन उसकी नींव उन असंख्य लोगों के संघर्ष से बनी थी जिनके नाम इतिहास की बड़ी पुस्तकों में शायद कम दिखाई देते हैं, पर स्थानीय स्मृतियों और दस्तावेजों में आज भी सुरक्षित हैं।

पश्चिमी रामगंगा घाटी के ये स्वतंत्रता सेनानी उसी अनकहे इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ियाँ हैं।


निष्कर्ष

पश्चिमी रामगंगा घाटी का स्वतंत्रता संग्राम हमें यह समझने का अवसर देता है कि भारत की स्वतंत्रता केवल बड़े नगरों और राजनीतिक केंद्रों की कहानी नहीं थी। इसकी जड़ें दूरस्थ पहाड़ी गाँवों तक फैली थीं।

गेवाड़ से सल्ट और चौकोट तक अनेक लोगों ने अपने स्तर पर स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया। जेल यात्राएँ, अर्थदण्ड और आंदोलन में सक्रिय भागीदारी इस संघर्ष की कठिनाइयों को सामने लाती हैं।

इन सेनानियों के नामों को संकलित करना केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास को उसके वास्तविक सामाजिक आधार के साथ पहचानना भी है।

“स्वतंत्रता का इतिहास केवल उन लोगों का नहीं जिन्होंने इतिहास लिखा,
बल्कि उन लोगों का भी है जिन्होंने अपने संघर्ष से इतिहास रचा।”

स्रोत

  1. बिष्ट, न. (2015) 

  2. देघाट सूचना-पट — स्थानीय रूप से उपलब्ध अभिलेखीय सूचना।

  3. आदिग्राम फुलोरिया के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से संबंधित उपलब्ध विवरण।

नोट: उक्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अतिरिक्त यदि आपके संज्ञान में कोई और भी हैं तो कृपया कमेन्ट के माध्यम से अवश्य साझा करें। 

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लेखक: डॉ. भावना जुयाल
© डॉ. भावना जुयाल, 2026. सर्वाधिकार सुरक्षित।
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